“बांग्लादेश भी छटपटा रहा, अब गंगा जल संधि पर हो सख्त कार्रवाई: निशिकांत दुबे ने सरकार से की मांग”
बांग्लादेश पर सख्त हुए निशिकांत दुबे: गंगा जल संधि खत्म करने की उठाई मांग, लश्कर से मुलाकात पर जताई नाराजगी
नई दिल्ली (शिखर दर्शन) //
पाकिस्तान के खिलाफ भारत में बढ़ते आक्रोश के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शनिवार को बांग्लादेश को भी चेताते हुए गंगा जल बंटवारा संधि समाप्त करने की मांग उठाई है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब बांग्लादेश को गंगा नदी का पानी देना बंद कर देना चाहिए। दुबे ने इस दौरान एक अंग्रेजी वेबसाइट की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें दावा किया गया है कि बांग्लादेश के एक अंतरिम सरकार के सलाहकार ने लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ ऑपरेटिव से मुलाकात की है। दुबे ने तीखा सवाल उठाया — “क्या इन पापियों को गंगाजल दिया जाना चाहिए?”
लश्कर से मुलाकात के आरोप पर बढ़ा संदेह
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के कानूनी सलाहकार डॉ. आसिफ नजरूल ने भारत के जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए आतंकी हमले के अगले ही दिन ढाका में लश्कर के वरिष्ठ ऑपरेटिव इजहार से मुलाकात की। इस घटनाक्रम से संदेह गहरा गया है कि बांग्लादेश की वर्तमान अंतरिम सरकार भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत में आक्रोश
गौरतलब है कि हाल ही में पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 26 भारतीय पर्यटकों की नृशंस हत्या कर दी थी, जिससे पूरे देश में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 1960 में हुई सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया। साथ ही अटारी बॉर्डर चेक पोस्ट बंद कर दिया गया है और पाकिस्तान के नागरिकों को जारी सभी वीजा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं। भारत ने पाकिस्तान से एक सप्ताह के भीतर अपने सभी रक्षा सलाहकारों को भी नई दिल्ली स्थित उच्चायोग से वापस बुलाने की मांग की है।
निशिकांत दुबे ने सिंधु जल संधि निलंबन का किया समर्थन
निशिकांत दुबे ने मोदी सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान को पानी की भारी किल्लत झेलनी पड़ेगी। साथ ही उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 1960 में उन्होंने ‘सांप को पानी पिलाने’ जैसा कार्य किया था, जब उन्होंने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे।
क्या है गंगा जल बंटवारा संधि?
भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में गंगा जल बंटवारा संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसका उद्देश्य गंगा नदी के जल का उचित और संतुलित वितरण सुनिश्चित करना था। 1975 में फरक्का बैराज के निर्माण के बाद उत्पन्न हुए जल विवाद के समाधान हेतु यह संधि की गई थी। इस संधि के तहत, गंगा नदी के जल स्तर के अनुसार पानी का बंटवारा निर्धारित किया गया है। यदि जल प्रवाह 70,000 क्यूसेक से कम होता है, तो भारत और बांग्लादेश को बराबर-बराबर पानी मिलता है। वहीं 70,000 से 75,000 क्यूसेक जल प्रवाह होने पर बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक और शेष भारत को मिलता है। यह संधि 30 वर्षों के लिए है और 2026 में समाप्त होगी, जिसे आपसी सहमति से नवीनीकृत किया जा सकता है।
फरक्का बैराज का महत्व
पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश सीमा से महज 10 किलोमीटर दूर स्थित फरक्का बैराज को 1975 में कोलकाता बंदरगाह के जलस्तर को बनाए रखने के लिए बनाया गया था। इसके माध्यम से गंगा नदी के पानी को हुगली नदी की ओर मोड़ा जाता है, जिससे बंदरगाह पर जहाजों के सुगम आवागमन को संभव बनाया जा सके।
