दमोह मिशन अस्पताल कांड: फर्जी डॉक्टर एन जॉन कैम जेल भेजा गया, 7 मरीजों की मौत, डिग्रियों पर उठे गंभीर सवाल
10 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने पर कोर्ट में पेश किए गए एन जॉन कैम को भेजा गया जेल
दमोह (शिखर दर्शन) // मध्यप्रदेश के दमोह में स्थित मिशन अस्पताल में 7 मरीजों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। फर्जी डिग्रियों के दम पर डॉक्टर बनकर मरीजों की जान लेने वाले एन जॉन कैम को शुक्रवार को 10 दिन की पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। एन जॉन कैम, जो खुद को कार्डियोलॉजिस्ट बताता था, पर फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हासिल कर सर्जरी करने और मरीजों की मौत का गंभीर आरोप है।
आरोपी डॉक्टर बोला— मेरी डिग्रियां असली हैं, कोर्ट पर भरोसा
न्यायालय में पेशी के दौरान आरोपी डॉक्टर एन जॉन कैम ने दावा किया कि उसकी सभी डिग्रियां वैध हैं और सच्चाई जल्द सामने आ जाएगी। उसने कहा कि उसे दमोह पुलिस और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। वहीं, आरोपी के अधिवक्ता सचिन नायक ने बताया कि हमने कोर्ट में यह दलील दी कि दस्तावेजों की सत्यता जांचने के लिए पुलिस की उपस्थिति आवश्यक नहीं है। न्यायालय ने आरोपी को ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेजने का आदेश दिया। अब आरोपी पक्ष सेशन कोर्ट में जमानत याचिका दायर करेगा।
नागपुर से बनाए फर्जी दस्तावेज, पूर्व उपराष्ट्रपति के फर्जी हस्ताक्षर भी किए इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि एन जॉन कैम उर्फ नरेंद्र विक्रमादित्य यादव ने महाराष्ट्र के नागपुर से फर्जी डिग्रियां बनवाई थीं। इनमें से एक डिग्री पर देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के जाली हस्ताक्षर भी पाए गए हैं। दमोह एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि डॉक्टर द्वारा 2013 में ली गई पांडिचेरी यूनिवर्सिटी की डिग्री भी फर्जी निकली है। आरोपी के पास और भी कई फर्जी डिग्रियां हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

प्रयागराज स्थित घर से मिली फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने की लैब
दमोह पुलिस की टीम ने आरोपी के प्रयागराज स्थित घर पर सर्चिंग की, जहां फर्जी दस्तावेज तैयार करने की एक पूरी लैब मिली। वहां से प्रिंटर, नकली सील, कागजात, आधार कार्ड और कई आईडी कार्ड जब्त किए गए। पुलिस के अनुसार, इसी डॉक्टर के खिलाफ 2013 में नोएडा में भी फर्जी डिग्री को लेकर एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद से वह फरार था।

दमोह मिशन अस्पताल का लाइसेंस रद्द, समिति के 9 सदस्यों पर FIR
इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन पर भी कार्रवाई की गई है। अस्पताल की प्रबंधन समिति के 9 सदस्यों के खिलाफ सिटी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। समिति पर धोखाधड़ी कर कैथ लैब संचालित करने का आरोप है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। सीएमएचओ डॉ. मुकेश जैन के अनुसार, प्रबंधन को दस्तावेज जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
छत्तीसगढ़ के अपोलो अस्पताल से भी जुड़े हैं तार, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत से जुड़ा मामला
इस मामले की गूंज छत्तीसगढ़ तक पहुंच चुकी है। बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में भी इसी फर्जी डॉक्टर ने सर्जरी की थी, जहां 7–8 मरीजों की मौत हुई थी। इन मृतकों में छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का नाम भी शामिल है। 20 अगस्त 2006 को उनके ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस को संदेह है कि उस समय भी ऑपरेशन इसी फर्जी डॉक्टर ने किया था।

चार सदस्यीय एसआईटी गठित, विदेश से जुड़ी डिग्रियों की भी जांच जारी
पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए एक चार सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। एन जॉन कैम ने ब्रिटेन से पढ़ाई करने का दावा किया है और कुछ पत्राचार भी प्रस्तुत किया है। पुलिस इन दस्तावेजों की भी गहनता से जांच कर रही है।
निष्कर्ष: दमोह मिशन अस्पताल का यह मामला न केवल चिकित्सा क्षेत्र में लापरवाही का घातक उदाहरण है, बल्कि इससे यह भी उजागर होता है कि कैसे फर्जी डिग्रियों और दस्तावेजों के आधार पर एक व्यक्ति ने अनेक लोगों की जान को खतरे में डाला। अब न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस की सख्त जांच ही पीड़ितों को न्याय दिला सकती है।
