17 अप्रैल महाकाल आरती: त्रिनेत्र और त्रिपुंड से सजे भगवान महाकाल का राजसी श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु
उज्जैन (शिखर दर्शन) //
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि, गुरुवार 17 अप्रैल को श्री महाकालेश्वर मंदिर में अलसुबह भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही बाबा महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, जिसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से उनका विधिवत अभिषेक पूजन संपन्न हुआ।
इसके पश्चात भगवान महाकाल का त्रिनेत्र और त्रिपुंड से अलंकरण किया गया। मस्तक पर चंदन और भांग अर्पित कर, उन्हें आभूषणों से सजाया गया और राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल ने रजत निर्मित शेषनाग का मुकुट, मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला धारण की। सुगंधित फूलों से बनी माला से भगवान का श्रृंगार कर उन्हें भस्म अर्पित की गई। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर पूजा पूर्ण की गई।
सुबह भस्म आरती के पावन अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर में उपस्थित होकर बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर आशीर्वाद भी मांगा। मंदिर परिसर ‘हर हर महादेव’, ‘जय जय श्री महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
हर गुरुवार की तरह इस दिन भी श्री महाकाल की आरती में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। भक्तों की आस्था और मंदिर की भव्यता ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि उज्जैन में स्थित यह ज्योतिर्लिंग केवल एक तीर्थ नहीं, अपितु आत्मिक अनुभव की दिव्य अनुभूति है।
