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रामनवमी पर भगवामय हुआ बंगाल, बीजेपी का भव्य शक्ति प्रदर्शन, सियासी गर्मी भी तेजसुवेंदु अधिकारी बोले – इस बार बंटेगा नहीं हिंदू समाज, ममता सरकार पर साधा निशाना

कोलकाता (शिखर दर्शन) // रामनवमी 2025 पर पूरे देश में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की भक्ति लहर देखने को मिली, वहीं पश्चिम बंगाल में यह पर्व खासा राजनीतिक रंग लेता नजर आया। रविवार सुबह से ही राज्य की सड़कों पर लाखों श्रद्धालु ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ उमड़ पड़े। शोभायात्राओं, झांकियों और भक्ति गीतों के बीच माहौल पूरी तरह भगवामय हो गया।

राज्यभर में विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच सहित बीजेपी से जुड़े संगठनों द्वारा सैकड़ों शोभायात्राएं निकाली गईं। अकेले कोलकाता में ही 60 से अधिक रैलियों का आयोजन किया गया, जिसके लिए सुरक्षा के मद्देनज़र 4,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा निगरानी में तैनात रहे।

रामनवमी के इस पर्व को बीजेपी ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े शक्ति प्रदर्शन में तब्दील कर दिया। नंदीग्राम से विधायक और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस अवसर पर अपने क्षेत्र के सोनाचूरा गांव में राम मंदिर की आधारशिला रखी। गौरतलब है कि यह वही स्थान है, जहां वर्ष 2007 में भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुई हिंसा में सात लोगों की मौत हो गई थी।

मंदिर शिलान्यास कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी ने तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा, “इस बार बंगाल में हिंदू समाज बंटेगा नहीं। भगवा लहर Bengal में स्पष्ट दिखाई दे रही है। आज ममता बनर्जी की हिंदू विरोधी राजनीति के खिलाफ जनलहर खड़ी हो चुकी है।” उन्होंने यह भी कहा कि “भगवान राम केवल हिंदुओं के नहीं, बल्कि सभी भारतीयों की आस्था के प्रतीक हैं। राम भारत के हैं, बंगाल के हैं, और हर सनातनी के हैं।”

रामनवमी के भव्य आयोजनों को लेकर राज्य में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बीजेपी पर धार्मिक अवसर को राजनीतिक मंच में बदलने का आरोप लगाया है। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, “भाजपा विकास की राजनीति से भाग रही है और धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है। वे राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बंगाल इसे स्वीकार नहीं करेगा।”

इस बीच प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए। शोभायात्राओं के मार्गों पर पुलिस की भारी तैनाती और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में पूरे आयोजन को शांतिपूर्वक संपन्न करने की तैयारी रही।

रामनवमी पर बंगाल की राजनीति में भले ही गर्मी बढ़ गई हो, लेकिन राज्य में श्रद्धा और भक्ति की भावनाओं के बीच भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया।

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