बस्तर संभाग

गृहमंत्री अमित शाह के दौरे से पहले नक्सलियों का शांति वार्ता का आह्वान, संघर्ष विराम के लिए रखीं शर्तें

जगदलपुर (शिखर दर्शन) // केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले माओवादियों ने संघर्ष विराम और शांति वार्ता की अपील की है। सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति ने भारत सरकार से ऑपरेशन ‘कागर’ को रोकने का आग्रह करते हुए कुछ शर्तों के साथ बातचीत के लिए अपनी तत्परता जाहिर की है। नक्सलियों द्वारा यह पत्र तेलुगु भाषा में जारी किया गया है।

गौरतलब है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 4 और 5 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इससे ठीक पहले माओवादी संगठन ने यह पत्र जारी किया, जिसे सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने सार्वजनिक किया है।

माओवादियों की प्रमुख मांगें और आरोप

  • संघर्ष विराम की अपील: माओवादियों ने सरकार से मध्य भारत में जारी सैन्य अभियान को तत्काल रोकने और बिना शर्त संघर्ष विराम लागू करने की मांग की है।
  • ऑपरेशन ‘कागर’ पर आपत्ति: माओवादियों ने भाजपा सरकार पर ‘कागर’ अभियान के तहत माओवादी प्रभावित इलाकों में उग्रवाद विरोधी अभियान के नाम पर बड़े पैमाने पर हिंसा और गिरफ्तारियां करने का आरोप लगाया है।
  • हताहत और मानवाधिकार उल्लंघन का दावा: नक्सलियों ने आरोप लगाया कि इस अभियान के दौरान 400 से अधिक माओवादी कार्यकर्ताओं और आदिवासी नागरिकों की हत्या की गई, महिलाओं के साथ अत्याचार हुए और कई निर्दोषों को गिरफ्तार कर यातना दी गई।
  • शांति वार्ता के लिए शर्तें: माओवादियों ने सरकार के सामने कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें आदिवासी क्षेत्रों से सुरक्षा बलों की वापसी, नए सैनिकों की तैनाती पर रोक और उग्रवाद विरोधी अभियानों को निलंबित करने की मांग शामिल है।
  • सरकार पर आरोप: माओवादियों ने सरकार पर आदिवासियों के खिलाफ ‘नरसंहार युद्ध’ छेड़ने और असंवैधानिक रूप से सैन्य बलों का उपयोग करने का आरोप लगाया है।

समर्थन जुटाने की अपील

माओवादियों ने बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों, छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं से शांति वार्ता के लिए सरकार पर दबाव बनाने की अपील की है। उन्होंने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का आह्वान भी किया है।

बातचीत के लिए तत्पर माओवादी

माओवादियों ने कहा है कि यदि सरकार उनकी शर्तों को मानती है और सैन्य अभियान रोकती है, तो वे तुरंत संघर्ष विराम की घोषणा कर वार्ता में शामिल होने को तैयार हैं।

गृहमंत्री अमित शाह के इस दौरे के दौरान राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अहम बैठकें होने की संभावना है। अब यह देखना होगा कि सरकार माओवादियों के इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देती है। शांति वार्ता के लिए माओवादी तत्परता

    • यदि सरकार उनकी पूर्वापेक्षाओं से सहमत होती है तो वे बातचीत में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करते हैं।

    • सीपीआई (माओवादी) का कहना है कि जैसे ही सरकार सैन्य अभियान बंद कर देगी, वे युद्धविराम की घोषणा करेंगे।

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