बस्तर में पानी संकट: इंद्रावती नदी बचाने किसानों का चक्काजाम, NH-30 पर घंटों ठप रही आवाजाही
बस्तर (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्राकृतिक संपदा से भरपूर इंद्रावती नदी अब अस्तित्व संकट से जूझ रही है। भीषण गर्मी से पहले ही नदी का जलस्तर तेजी से घटने लगा है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा। इस गंभीर समस्या को लेकर किसानों ने पहली बार सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन किया। सोमवार को ‘इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले किसानों ने नेशनल हाईवे-30 पर भोंड के पास चक्काजाम कर दिया, जिससे हाईवे के दोनों ओर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

किसानों की अनसुनी मांगें बनी आंदोलन की वजह
कुछ दिन पहले किसानों ने बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इंद्रावती नदी में बने स्टॉप डैम से पानी छोड़ने सहित छह सूत्रीय मांगें रखी थीं। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए एक सप्ताह का समय दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर उन्होंने मजबूर होकर चक्का जाम कर दिया।
हाईवे पर जाम, प्रशासन हरकत में आया
प्रदर्शन के कारण जगदलपुर-रायपुर मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालात बिगड़ते देख प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया। किसानों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और स्टॉप डैम का पानी नहीं छोड़ा जाता, तब तक वे हाईवे पर डटे रहेंगे।

सूखती इंद्रावती पर खेलते हैं बच्चे, बढ़ा अवैध रेत खनन
पिछले कुछ वर्षों से इंद्रावती नदी का जलस्तर लगातार गिर रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कहीं-कहीं नदी पूरी तरह सूख चुकी है और बच्चे उसमें क्रिकेट खेल रहे हैं। इसी बीच रेत माफिया भी सक्रिय हो गए हैं और नदी से अवैध उत्खनन जारी है, जिससे जलस्तर और तेजी से गिर रहा है।
प्रशासन ने दिया 5% पानी छोड़ने का आश्वासन
किसानों के दबाव और चक्का जाम के चलते SDM ने स्टॉप डैम से 5% पानी छोड़ने का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी पीछे हटे और हाईवे पर आवागमन फिर से शुरू हो सका। हालांकि किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी बाकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे और बड़ा आंदोलन करेंगे।
सरकार और प्रशासन के लिए चेतावनी
किसानों के इस आंदोलन से साफ है कि अगर जल्द ही इंद्रावती नदी को बचाने के ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो संकट और गहरा सकता है। प्रशासन को अब इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना होगा, वरना बस्तर के किसान उग्र आंदोलन के लिए मजबूर हो सकते हैं।