रायपुर संभाग

बजट से नाखुश राज्य कर्मचारी, वित्त मंत्री ओपी चौधरी की आलोचना तेज

रायपुर (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ सरकार के दूसरे बजट के बाद राज्य के कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। कर्मचारियों का कहना है कि इस बजट में उनके हितों की अनदेखी की गई है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा हाथ से लिखे गए इस बजट में कर्मचारियों को केवल महंगाई भत्ते का झुनझुना थमाया गया है, जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

कर्मचारियों की मांगों को किया नजरअंदाज
गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब से कर्मचारियों ने राजनीतिक प्रतिबद्धता दिखाई है, तब से उनकी मांगों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार भी कर्मचारियों की कई अहम मांगों को बजट में शामिल नहीं किया गया, जिससे व्यापक असंतोष है।

फंड के अभाव का बहाना, कर्मचारियों की उपेक्षा
नवरंग ने कहा कि वित्त मंत्री ओपी चौधरी का बजट 100 पन्नों से भी अधिक का है, जिसे उन्होंने खुद लिखा है, लेकिन कर्मचारियों के हितों के लिए उसमें जगह नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की अर्थव्यवस्था और सिस्टम का संचालन करने वाले कर्मचारियों-अधिकारियों के लिए वित्त मंत्री ने कुछ पन्ने कम कर दिए।

महत्वपूर्ण मांगें हुईं दरकिनार
गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार, कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को इस बजट में जगह नहीं मिली। इनमें कैशलेस चिकित्सा सुविधा, संविदा व अनियमित कर्मचारियों की सेवा नियमितीकरण, शिक्षकों की पुरानी सेवा के आधार पर ओल्ड पेंशन की गणना, क्रमोन्नति, समयमान वेतन, चार स्तरीय वेतनमान जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। इन मांगों की उपेक्षा से राज्य के कर्मचारी और अधिकारी बेहद निराश हैं।

कर्मचारियों में आक्रोश, सरकार से पुनर्विचार की मांग
संघ ने कहा कि बजट के बाद कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और वे सरकार से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे भविष्य में आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर सकते हैं।

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