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नया आयकर बिल 2025: वित्त मंत्री आज पेश करेंगी विधेयक, जानें कौन-सी आय होगी टैक्स फ्री और क्या होंगे बड़े बदलाव

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज (13 फरवरी) संसद में नया आयकर बिल 2025 पेश करेंगी। यह विधेयक 1961 के मौजूदा आयकर कानून की जगह लेने के लिए तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाना है। सरकार ने इस बिल के जरिए पुराने कानून की जटिलताओं को दूर करने, मुकदमेबाजी के बोझ को कम करने और टैक्स प्रणाली को डिजिटल रूप से अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य रखा है।

इस विधेयक में करदाताओं को राहत देने वाले कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘फाइनेंशियल इयर’ और ‘असेसमेंट इयर’ की जगह ‘टैक्स इयर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, कुछ खास तरह की आय को टैक्स-फ्री रखा गया है, राजनीतिक दलों और इलेक्टोरल ट्रस्ट को कर छूट दी गई है, और डिजिटल टैक्स प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य किया गया है।

बिल के प्रमुख बदलाव और नए प्रावधान

1) नया टैक्स इयर और कर योग्य आय की स्पष्ट परिभाषा

  • टैक्स नियमों की जटिलता को कम करने के लिए अब ‘फाइनेंशियल इयर’ और ‘असेसमेंट इयर’ की जगह ‘टैक्स इयर’ का प्रयोग किया जाएगा।
  • भारत में रहने वाले नागरिकों के साथ-साथ विदेशों से आय अर्जित करने वालों के लिए भी नए टैक्स नियम लागू होंगे।
  • संपत्ति हस्तांतरण से होने वाली आय पर कराधान के नए नियम जोड़े गए हैं।

2) कौन-सी आय होगी टैक्स फ्री?

नए इनकम टैक्स बिल की अनुसूची-2,3,4,5,6 और 7 के अनुसार, निम्नलिखित आय टोटल इनकम का हिस्सा नहीं मानी जाएगी और इस पर टैक्स नहीं लगेगा:

  • कृषि से होने वाली आय (कुछ शर्तों के साथ)
  • पीएफ और बीमा से मिलने वाली राशि
  • राजनीतिक दलों और इलेक्टोरल ट्रस्ट की आय
  • धार्मिक ट्रस्ट और सामाजिक कल्याण संस्थाओं को मिलने वाला दान
  • स्टार्टअप्स और एसएमई सेक्टर को कर में रियायतें

3) वेतनभोगी और व्यवसायियों के लिए नई कर व्यवस्था

  • वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए नया टैक्स ढांचा तैयार किया गया है।
  • हाउस ओनर्स को किराये से प्राप्त आय पर छूट और कटौती के नए नियम जोड़े गए हैं।
  • शेयर बाजार और संपत्ति निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ (Capital Gains) कराधान में बदलाव।
  • व्यवसाय और प्रोफेशनल करदाताओं के लिए नई कटौती और टैक्स छूट।

4) डिजिटल और पारदर्शी टैक्स प्रणाली

  • सरकार ने टैक्स भुगतान की प्रक्रिया को अधिक सरल और डिजिटल बनाने के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य कर दिया है।
  • ऑनलाइन टैक्स कैलकुलेशन सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे करदाता खुद अपने टैक्स की गणना कर सकेंगे।
  • जीएसटी और इनकम टैक्स को एकीकृत करने पर विचार किया जा रहा है।

5) व्यापार और प्रोफेशनल इनकम के नए नियम

  • स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों को टैक्स में छूट और आसान कराधान प्रक्रिया मिलेगी।
  • ऑनलाइन और डिजिटल कारोबार से होने वाली आय पर नए टैक्स नियम लागू होंगे
  • बीमा, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर के लिए विशेष कर लाभ।
  • व्यापारिक खर्चों और कटौती के लिए नए प्रावधान जोड़े गए हैं।

6) पेंशन और निवेश पर कर लाभ

  • एनपीएस (NPS) और EPF पर टैक्स छूट को बढ़ाया गया।
  • बीमा योजनाओं और म्यूचुअल फंड निवेश पर कर लाभ।
  • रिटायरमेंट फंड पर अधिक टैक्स छूट के नए नियम।

7) टैक्स चोरी पर सख्त प्रावधान और भारी जुर्माना

सरकार ने कर चोरी रोकने के लिए कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू किए हैं:

  • गलत या अधूरी जानकारी देने पर भारी जुर्माना लगेगा।
  • जानबूझकर टैक्स चोरी करने वालों पर मुकदमा चलाया जाएगा।
  • बकाया टैक्स का भुगतान न करने पर ब्याज और अतिरिक्त पेनल्टी।
  • कर चोरी करने वालों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान।

8) टैक्स प्रशासन में बड़ा सुधार

  • कर अधिकारियों को नई ट्रेनिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस किया जाएगा।
  • टैक्स निरीक्षण और छानबीन के नियमों में बदलाव।
  • करदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए “टैक्सपेयर चार्टर” लागू किया जाएगा।

क्यों लाया जा रहा है नया आयकर बिल?

भारत का मौजूदा आयकर कानून 1961 में बनाया गया था और समय के साथ इसमें सैकड़ों संशोधन किए गए, जिससे यह अत्यधिक जटिल हो गया। नया आयकर विधेयक 2025 टैक्स प्रणाली को सरल, स्पष्ट और विवाद मुक्त बनाने के लिए लाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य है:

  • करदाताओं के लिए टैक्स प्रक्रिया को आसान बनाना।
  • मुकदमेबाजी के बोझ को कम करना।
  • डिजिटल और पारदर्शी टैक्स प्रणाली लागू करना।
  • व्यापारियों, स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को कर में राहत देना।

नया आयकर विधेयक 2025 करदाताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। इससे टैक्स प्रणाली को पारदर्शी, डिजिटल और आसान बनाने का प्रयास किया गया है। कुछ आय स्रोतों को पूरी तरह कर-मुक्त रखा गया है, जबकि टैक्स चोरी पर कड़े नियम लागू किए गए हैं। संसद में पेश होने के बाद इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होगी और इसके अंतिम स्वरूप पर मुहर लगने के बाद इसे अधिनियम के रूप में लागू किया जाएगा।

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