उत्तरप्रदेश

संगम में श्रद्धा की लहर: माघ पूर्णिमा पर 2.04 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में डुबकी,जानिए अब तक कितने भक्त पहुंचे महाकुंभ

प्रयागराज (शिखर दर्शन) // महाकुंभ में देश-दुनिया से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। लाखों की संख्या में लोग प्रयागराज पहुंचकर संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। माघ पूर्णिमा के दिन रात 8 बजे तक 2.04 करोड़ श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान कर चुके हैं, जबकि अब तक कुल 48 करोड़ से अधिक श्रद्धालु इस महापर्व में भाग ले चुके हैं।

45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान

इस बार महाकुंभ में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया है। हर 12 साल में आयोजित होने वाले इस कुंभ में 144 वर्षों बाद एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, क्योंकि अब तक 12 कुंभ पूरे हो चुके हैं। इसी कारण इसे महाकुंभ कहा जा रहा है और इसमें आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अब तक के किसी भी कुंभ से अधिक बताई जा रही है।

श्रद्धालुओं की गिनती के लिए उत्तर प्रदेश सरकार हाईटेक तकनीक का उपयोग कर रही है। इस बार मेले में AI बेस्ड कैमरों की मदद से भीड़ का आंकलन किया जा रहा है, जिससे सटीक गणना संभव हो पा रही है।

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित कई हस्तियों ने किया संगम स्नान

महाकुंभ में अब तक कई बड़ी हस्तियां आस्था की डुबकी लगा चुकी हैं। इनमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं।

इसके अलावा, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने मंत्रिमंडल के साथ संगम में स्नान कर चुके हैं।

राजनीतिक हस्तियों के अलावा अखिलेश यादव, अभिनेता और सांसद रवि किशन, प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास, 73 देशों के प्रतिनिधिमंडल और भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक भी इस दिव्य आयोजन में शामिल हुए हैं।

महाकुंभ का यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम करोड़ों श्रद्धालुओं को आस्था, भक्ति और भारतीय परंपराओं की दिव्यता का अनुभव करा रहा है। संगम नगरी प्रयागराज इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन रही है।

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