अरपा नदी की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त! कहा— अवैध उत्खनन ने नदी को बना दिया खोखला, नगर निगम आयुक्त को 15 दिन में शपथपत्र दाखिल करने का आदेश

हाईकोर्ट की अवैध उत्खनन करने वालों पर ‘मीसा’ के तहत कार्रवाई की चेतावनी
बिलासपुर (शिखर दर्शन) // अरपा नदी में बढ़ते प्रदूषण और अवैध उत्खनन को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश रविंद्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध उत्खनन करने वालों पर ‘मीसा’ (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को 15 दिन के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2025 को होगी।
हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, कहा— अरपा में घास उग आई, पानी नहीं मिल रहा
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अरपा नदी की दयनीय स्थिति पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि अवैध उत्खनन के चलते नदी खोखली हो चुकी है, और अब वहां घास उग आई है। न्यायाधीशों ने कहा, “लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल रहा। बाढ़ आने पर नदी में अस्थायी रूप से पानी भरता है, लेकिन असल में यह बैरल लैंड बन चुकी है।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन कोई भी कानून बनाए, लेकिन अवैध खनन करने वाले अपनी ताकत दिखाते हुए उसे तोड़ देते हैं, और सरकार सिर्फ मूकदर्शक बनी रहती है।
60% सीवरेज जल का हो रहा उपचार, शेष 40% के लिए बना नया प्लान
राज्य सरकार और नगर निगम की ओर से अधिवक्ता आर. एस. मरहास ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी 2025 को नगर निगम आयुक्त की ओर से दाखिल शपथपत्र में कहा गया है कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड वर्तमान में केवल 60% सीवरेज जल का उपचार करने में सक्षम है। शेष 40% सीवरेज जल के उपचार के लिए पुणे की ब्लू स्ट्रीम इंफ्रा डेवलपमेंट कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्राप्त कर ली गई है। तकनीकी सत्यापन के लिए यह रिपोर्ट पीएचई विभाग के मुख्य अभियंता को भेजी गई थी, लेकिन अब तक इसे स्वीकृति नहीं मिली है।
नगर निगम के अनुसार, 10 फरवरी 2025 को कंपनी ने संशोधित प्लान प्रस्तुत कर दिया है, जिसकी जांच के लिए 15 दिन का समय लगेगा। यदि रिपोर्ट सही पाई जाती है, तो इसे प्रशासनिक स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
कोर्ट ने नगर निगम को 15 दिन में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को आदेश दिया कि वे 15 दिन के भीतर विस्तृत शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि अरपा नदी को प्रदूषण से बचाने और अवैध उत्खनन रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2025 को होगी, जिसमें सरकार और नगर निगम को अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।



