बिलासपुर संभाग

नगर निगम चुनाव : वार्ड नंबर 29 में कांग्रेस के गढ़ को भेदने की चुनौती , 40 वर्षों से कांग्रेस का अभेद्य किला, क्या इस बार बदलेगा इतिहास ?

बिलासपुर (शिखर दर्शन) // बिलासपुर नगर निगम चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है, और वार्ड नंबर 29 इस बार भी राजनीतिक सुर्खियों में बना हुआ है। इस वार्ड को बीते लगभग 40 वर्षों से कांग्रेस का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है, जिसे आज तक कोई भी पार्टी भेद नहीं सकी। इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने कांग्रेस को चुनौती देने के लिए कमर कस ली है।

वार्ड 29 में प्रमुख उम्मीदवार

इस वार्ड से कांग्रेस ने शेख असलम को प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा ने वी. मधुसूदन राव को मैदान में उतारा है। इनके अलावा कार्टर रेड्डु और एडवर्ड मसीह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।

शेख गफ्फार: जिनकी छवि आज भी हावी

वार्ड नंबर 29 में कांग्रेस की मजबूत पकड़ के पीछे पूर्व पार्षद स्वर्गीय शेख गफ्फार का नाम सबसे अहम रहा है। उन्होंने अपने प्रभावशाली जनसेवा कार्यों के चलते इस वार्ड को कांग्रेस का अजेय किला बना दिया था। वे अपने सरल स्वभाव और समर्पण के लिए पहचाने जाते थे। उनके रहते विपक्ष को यहां से जीत दर्ज करना नामुमकिन माना जाता था।

गफ्फार के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने उनके छोटे भाई शेख असलम को मैदान में उतारा, जिन्हें सहानुभूति लहर का फायदा मिला और वे भारी मतों से विजयी हुए। हालांकि, अपने कार्यकाल में वे मतदाताओं की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए, जिससे अब जनता बदलाव की ओर देख रही है।

क्या इस बार बदलेगा समीकरण ?

इस चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के इस किले को भेदने के लिए भाजपा ने वी. मधुसूदन राव को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी कार्टर रेड्डु और एडवर्ड मसीह भी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं।

कार्टर रेड्डु, जो पहले कांग्रेस से पार्षद रह चुके हैं और कभी शेख गफ्फार के करीबी माने जाते थे, इस बार कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इसी तरह, एडवर्ड मसीह भी कांग्रेस से असंतुष्ट होकर स्वतंत्र रूप से मैदान में हैं। सूत्रों से पता चल है की कांग्रेस ने इन दोनों को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित भी कर दिया है।

भाजपा की रणनीति और कांग्रेस के लिए मुश्किलें

भाजपा इस बार वार्ड में कांग्रेस की पकड़ को कमजोर करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। नगर विधायक अमर अग्रवाल स्वयं वार्ड में भाजपा के लिए प्रचार अपनी पूरी ताकत सहित अभियान में जुटे हैं। वहीं कांग्रेस के लिए अपने ही बागी नेताओं की चुनौती मुश्किलें खड़ी कर रही है।

चुनाव में जनता का मूड

मतदान के दिन वार्ड में मतदाताओं के बीच चर्चाओं से संकेत मिल रहे हैं कि इस बार बदलाव की लहर चल सकती है। हालांकि, शेख गफ्फार का प्रभाव अभी भी कायम है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हैं या बदलाव के पक्ष में मतदान करते हैं।

अब नतीजे ही तय करेंगे कि क्या कांग्रेस अपना गढ़ बचाने में सफल होगी या फिर भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी इस किले को भेदने में कामयाब होंगे।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!