भारत-अमेरिका के डिपोर्टेशन मुद्दे पर सियासी घमासान, विदेश मंत्री जयशंकर ने राज्यसभा में दी सफाई

भारत और अमेरिका के बीच अवैध प्रवासियों के डिपोर्टेशन पर सियासत गरमा गई है। विपक्षी पार्टियां लगातार सरकार पर निशाना साध रही हैं, वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में इस पर जवाब देते हुए सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह कोई नया मामला नहीं है, और साल 2009 से अवैध प्रवासियों को नियमित रूप से वापस भेजा जाता रहा है।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र संधि का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया कानूनी प्रवास को बढ़ावा देने और अवैध प्रवास को रोकने के लिए है। उन्होंने कहा, “हर देश में राष्ट्रीयता की जांच होती है और हमारे देश के साथ यह प्रक्रिया हमेशा से रही है। 2012 से लागू स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत डिपोर्ट किए गए प्रवासियों को सुरक्षित तरीके से मिलिट्री प्लेन में भेजा जाता है।”
इस पर विपक्षी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। कई सांसदों ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन करते हुए हथकड़ी पहनकर अपनी असहमति जताई। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती का जिक्र करते हुए इस घटना की निंदा की।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत सरकार इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों से लगातार बातचीत कर रही है, ताकि निर्वासित लोगों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार न हो। उनका ध्यान अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर है, और सरकार इस दिशा में अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करती है।

अमेरिका से डिपोर्ट किए गए इन अवैध प्रवासियों को लेकर सड़कों से संसद तक हलचल मच गई है। यह मामला भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है, जहां सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक जारी है।



