उत्तरप्रदेश

पीएम मोदी ने संगम में लगाई आस्था की डुबकी, नेत्र कुंभ कार्यक्रम में होंगे शामिल

प्रयागराज (शिखर दर्शन) // प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रयागराज पहुंचकर संगम में आस्था की डुबकी लगाई और मां गंगा का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। गंगा स्नान और पूजन के बाद प्रधानमंत्री सेक्टर 6 में बनाए गए स्टेट पवेलियन का अवलोकन करेंगे और वहां से नेत्र कुंभ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना होंगे। यह कार्यक्रम उनके दौरे का मुख्य आकर्षण है।

प्रधानमंत्री मोदी लगभग ढाई घंटे तक प्रयागराज में रहेंगे और इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। उनके आगमन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

संगम तट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

प्रधानमंत्री के प्रयागराज पहुंचते ही संगम नगरी में उत्साह का माहौल दिखा। उन्होंने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया, जिस पर श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। सीएम योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने भी पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया। यह प्रधानमंत्री का महाकुंभ के दौरान दूसरा दौरा है। इससे पहले वे 13 दिसंबर को यहां आए थे।

सुबह 10:05 बजे पीएम मोदी प्रयागराज एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से वे सीधे अरैल घाट के लिए रवाना हुए। सुबह 10:45 बजे अरैल घाट पहुंचने के बाद नाव के जरिए संगम नोज पहुंचे और ठीक 11 बजे गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान और पूजन के बाद उन्होंने सेक्टर 6 स्थित स्टेट पवेलियन का अवलोकन किया और वहां से नेत्र कुंभ कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए।

महाकुंभ में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद

हर 12 साल में आयोजित होने वाला कुंभ इस बार विशेष संयोग लेकर आया है। 144 वर्षों में पहली बार यह 13वां कुंभ महाकुंभ के रूप में मनाया जा रहा है। अनुमान के अनुसार, इस महाकुंभ में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे। श्रद्धालुओं की गणना और सुरक्षा के लिए इस बार यूपी सरकार ने हाईटेक तकनीकों का सहारा लिया है। मेला क्षेत्र में AI आधारित कैमरों की मदद से भीड़ की निगरानी की जा रही है।

दुनिया भर में हो रही महाकुंभ की चर्चा

महाकुंभ 2025 की दिव्यता और भव्यता की गूंज देश-विदेश तक पहुंच रही है। लाखों विदेशी श्रद्धालु भी इस ऐतिहासिक आयोजन में हिस्सा लेने आ रहे हैं। भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएं विदेशी भक्तों को आकर्षित कर रही हैं। अब तक 35 करोड़ से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों ने त्रिवेणी संगम में शाही स्नान कर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया, जबकि 10 लाख से अधिक श्रद्धालु कल्पवास कर रहे हैं।

महाकुंभ का पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच 12 दिनों तक घमासान युद्ध हुआ था। इस दौरान अमृत की कुछ बूंदें धरती पर चार स्थानों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरीं। इन्हीं स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन होता है।

ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार, जब गुरु वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तब प्रयागराज में कुंभ का आयोजन होता है। इसी प्रकार अन्य स्थानों पर भी कुंभ का निर्धारण किया जाता है। इस ऐतिहासिक और पवित्र आयोजन में आस्था की डुबकी लगाकर करोड़ों श्रद्धालु जीवन को पवित्र और कृतार्थ करने का अवसर प्राप्त करते हैं।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच होगा भव्य आयोजन

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। संगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई है। कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि वे बिना किसी बाधा के गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा ले सकें।

महाकुंभ 2025 एक ऐतिहासिक और अद्वितीय आयोजन बनने जा रहा है, जिसमें पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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