महामाया देवी दर्शन के लिए बिलासपुर से रतनपुर तक सड़क पर श्रद्धालुओं का हुजूम , प्रशासन का भारी वाहनों के आवा जाहि पर रोक ,पदयात्रियों की सेवा करने विभिन्न व्यापारिक वा स्वयमसेवी संस्थाओं ने लगाया निःशुल्क स्टॉल !
बिलासपुर // जिला मुख्यालय से लगभग 24 किलोमीटर दूर कोटा ब्लाक अंतर्गत महामाया देवी का मंदिर स्थित है , यह देवी की 51 सक्तिपिठो में से एक माना जाता है, ऐसा अनुमान है रतनपुर के कल्चुरी राजा ने इस मंदिर की का विनिर्माण कराया था । इस मंदिर में देवा की प्रतिमा महामाया देवी के रूप में विराजमान है नवरात्रि में यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है । श्रद्धालुओं की भीड़ देखते बन रही है, यहां तक की देवी के भक्त शहर से पैदल ही लाखो की संख्या में निकल पड़े है। और पूरी रात इस रोड पर पब्लिक पैदल चल रही है महामाया के भक्तो की भीड़ पदयात्रियों के रूप में इतनी ज्यादा है की पुलिस प्रशासन को पूरी रात ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए भरी मशक्कत करनी पड़ रही है । पदयात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रतनपुर से बिलासपुर तक भारी वाहनों के आवा जाहि पर सुबह निश्चित समय तक के लिए रोक लगा दी गई है ।
आज से लगभग 32 वर्ष पहले सरकंडा के कुछ लोगो ने नवरात्रि की सप्तमी वाली रात को पैदल चल कर महामाया दर्शन करने की शुरुआत की थी। उस समय महज बीस पच्चीस लोग इसमें हिस्सा लिया करते थे परंतु आज स्थिति यह है की सप्तमी और अष्टमी की रात महामाया दर्शन के लिए जाने वाले भक्तो की संख्या लाखों में होती है इसे देख शहर के व्यापारीगण, स्वयंसेवी संस्थाएं तथा अन्य गणमान्य नागरिकों के द्वारा बिलासपुर से रतनपुर तक अलग अलग अपनी हैसियत के हिसाब से पदयात्रियों की सेवा के लिए पंडाल वा स्टॉल लगाए जाते है । जिसमे की पदयात्रियों की सेवा की जा सके, यदि वो थक गय हो तो थोड़ा विश्राम कर सके साथ ही साथ माता के भक्तो के लिए ज्यादातर निशुल्क जल ,जलपान फलाहारी चाय इत्यादि का प्रबंध किया जाता है इस वर्ष भी अनेक सम्मानित नागरिकों के साथ साथ ” छत्रपति राजे सेवा समिति बिलासपुर ” के द्वारा ” नवरात्र सेवा शिविर ” खंडोबा मंदिर के पास रतनपुर रोड में लगाया गया ।

