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“अष्टमी कन्या पूजन” नवरात्रि के पावन पर्व की विशिष्ठ गरिमा, देवी को प्रसन्न करने की अद्भुत परंपरा !

बिलासपुर // आस्था का पर्व ” नवरात्रि ” शक्ति की आराधना के लिए समर्पित नव दिन देवी के अलग अलग रूपों की साधना से संपन्न साधकों को अपनी ओर आध्यात्मिक संवेदना में समाहित वा अभिभूत करता एक वैदिक सनातन परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है । दुनिया के किसी भी कोने में नवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा हो और देवी के बालिका स्वरूप की आराधना ना हो तो नवरात्रि पर्व के पूजा की सभी प्रक्रियाएं अधूरी ही कहलांगी यही सनातनी परंपरा है ,यही सनातनी विचारधारा है। हमारे भारत देश की लाखो वर्ष पुरानी यह वैदिक परंपरा है जिसके सिद्धांतो के अनुसार हम नन्ही बालिकाओं में हमेशा ही देवी का रूप देखते आए है । अब वह बालिका चाहे किसी भी समुदाय से संबंध रखती हो सनातनी दृष्टिकोण से वह देवी का स्वरूप ही मानी जाती है तथा हर सनातनी को वह भावनात्मक रूप से अपनी और आकर्षित करती है । नारी के इस रूप की विशिष्टता वा सम्मान जिसकी वो प्राकृतिक एवम मानवीय मूल्यों के सर्वोच्च शिखर पर पूर्णरूप से अधिकरणी है उसके इस अधिकार का संरक्षण वा संवर्धन सनातनी व्यवस्था और वैदिक परंपराओं में ही निहित है और उसमे ही में शाश्वत रूप में संभव है । इसीलिए हम नवरात्रि के पावन पर्व में देवी की उपासना के समापन से पूर्व में पवित्र कन्याओं का सम्मान करना ना तो भूलते है और ना ही हमारी वैदिक रीति वा आध्यात्मिक जिम्मेदारी हमे भूलने देती है । हमारी भारतीय पौराणिक ऋषि परंपरा के समय से ही नारी को सम्मानीय समीकरण के प्रतिशत में सदेव ही उच्चतम स्थान में रखा गया है । दुनिया की सबसे प्राचीन मानव सभ्यता के विकसित होते ही हम नारी के सम्मान के लिए भरसक प्रयत्नशील रहे है । फिर भी इतिहास में ऐसे अक्रांताओ ने जन्म लिया जिन्होंने उसकी गरिमा वा सम्मान को तार तार करने की नाकामयाब कोशिश की है , दुनिया ने देखा है और इतिहास भी साक्षी है की जब भी किसी ” नीच निगाहों ” ने नारी के अस्तित्व को कुचलने की कोशिश की है ” मिट्टी में मिला दिया गया है “, यही तो नारी के संरक्षण की व्यथा है की जब जब किसी नारी के स्वाभिमान की रक्षा का विषय आता है तब तब अदम्य साहस के साथ वो दुश्मनों पर टूट पड़ी है । नवरात्रि का पावन पर्व हमे शक्ति की आराधना के आधार पर सदैव नारी में देवी का रूप देखने और उसका सम्मान करने की अभूतपूर्व ,असीम मानसिक संवेदना वा साहस प्रदान करता है । इसलिए हम नवरात्रि में नव दिन देवी के अलग अलग रूपों की उपासना करने के पश्चात नव कन्या पूजन वा कन्यभोज की प्रक्रिया को संपन्न कर उनके प्रति मानसिक आदर भाव समर्पित करते है। यही नवरात्रि के पावन पर्व की गरिमा है और देवी को प्रसन्न करे की अद्भुत परम्पर भी ।

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