वक्फ पर JPC की बैठक में भारी हंगामा, निशिकांत दुबे और कल्याण बनर्जी के बीच हुई तीखी नोकझोंक, ओवैसी समेत 10 विपक्षी सांसद सस्पेंड , वक्फ संशोधन बिल पर जेपीसी की बैठक में हुआ बवाल


नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // वक्फ संशोधन बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक शुक्रवार को एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई। बैठक में पश्चिम बंगाल के टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने अचानक बैठक की तात्कालिकता पर सवाल उठाए, जिसके बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों के बीच की बहस इतनी बढ़ गई कि मार्शल को बुलाना पड़ा, और इसके चलते बैठक को कुछ देर के लिए स्थगित करना पड़ा।
JPC कमेटी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने इस घटनाक्रम के बाद कल्याण बनर्जी, ओवैसी सहित 10 विपक्षी सांसदों को एक दिन के लिए सस्पेंड कर दिया। यह पहली बार नहीं था जब जेपीसी की बैठक में हंगामा हुआ हो। इससे पहले भी ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं, और वक्फ पर बनी जेपीसी की बैठक अब दो दिन तक चलेगी।
विपक्ष का विरोध और बैठक की तारीख पर विवाद
जेपीसी की बैठक में विपक्षी दलों के सांसदों ने प्रमुख रूप से यह मांग की थी कि बैठक की तारीख 27 जनवरी से बढ़ाकर 31 जनवरी की जाए। समिति द्वारा पहले 24 और 25 जनवरी को क्लॉज दर क्लॉज अमेंडमेंट पर चर्चा के लिए तारीखें निर्धारित की गई थीं, लेकिन पिछले दिन अचानक तारीखों को बदलकर 27 जनवरी कर दिया गया था, जिससे विपक्षी सांसदों में असंतोष फैल गया।
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बैठक का समय बदलने का विरोध करते हुए इसे एक “तमाशा” करार दिया और बैठक को 30 या 31 जनवरी तक के लिए स्थगित करने की मांग की। वहीं, भाजपा के निशिकांत दुबे ने विपक्षी दलों के आचरण पर आलोचना करते हुए कहा कि वे बहुमत की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्षी दलों का गणतंत्र दिवस के बाद बैठक बुलाने का अनुरोध
विपक्षी दलों ने गणतंत्र दिवस के बाद बैठक बुलाने की मांग की थी। लोकसभा में DMK के मुख्य सचेतक ए राजा ने 24 और 25 जनवरी की बैठक स्थगित करने का आग्रह किया था। राजा ने जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल को पत्र लिखकर कहा था कि पटना, कोलकाता और लखनऊ में जेपीसी के दौरे 21 जनवरी को ही पूरे हो गए थे, और बैठक की तारीखों की घोषणा बिना किसी पूर्व सूचना के की गई।
31 जनवरी को संसद में रिपोर्ट पेश करने की योजना
यह समिति 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों से मिलकर बनी है, जिसमें 13 सदस्य विपक्षी दलों से हैं। माना जा रहा है कि समिति अपनी 500 पन्नों की रिपोर्ट आगामी बजट सत्र में 31 जनवरी को संसद में पेश करेगी। पिछले छह महीने में समिति ने दिल्ली में 34 बैठकें की हैं और कई राज्यों का दौरा भी किया है।
समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने उम्मीद जताई कि रिपोर्ट से लोगों को फायदा होगा, और कहा कि सभी चर्चाएं सकारात्मक माहौल में हुई हैं।
