दिल्ली

जमानत की उम्मीद में पहुंचा, मिली जेल: सुप्रीम कोर्ट ने कानून से खेल करने वाले शख्स को सिखाया सबक, जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जमानत की कोशिशों को मिली नकारात्मक प्रतिक्रिया, शख्स को मिला जेल

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // कानूनी प्रक्रिया से खेल कर एक व्यक्ति को भारी पड़ा। यह हैरान करने वाला मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का है, जिसमें अग्रिम जमानत के लिए पहुंचे एक व्यक्ति को न केवल 2 लाख रुपये का जुर्माना हुआ, बल्कि पुलिस को 3 दिन के अंदर उसकी गिरफ्तारी का आदेश भी दिया गया।

दरअसल, यह मामला अमृतसर के कैंटोनमेंट थाने में दर्ज हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट (Arms Act) से संबंधित है। याचिकाकर्ता प्रतीक अरोड़ा डेढ़ साल से इस केस से बचने के लिए हाईकोर्ट (High Court) को धोखा दे रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी चालाकी को पकड़ते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है और एक से ज्यादा बार अग्रिम जमानत की मांग खारिज होने के बाद भी उसने समर्पण नहीं किया।

प्रतीक अरोड़ा ने पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी, लेकिन 30 सितंबर 2024 को जजों के सख्त रुख के कारण उसे वापस ले लिया। दो महीने बाद उसने फिर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की। 11 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए यह पाया कि एफआईआर 25 जून, 2023 को दर्ज होने के बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी। पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित करने के लिए भी निचली अदालत में कोई आवेदन नहीं दायर किया था।

इसके बाद प्रतीक अरोड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट के 30 सितंबर वाले आदेश को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उसकी याचिका पर विचार करते हुए यह कहा कि याचिकाकर्ता लगातार कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है। कोर्ट ने उसे 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसे पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी को जमा करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अमृतसर के पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया कि वह 3 दिन के भीतर याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी सुनिश्चित करें और गिरफ्तारी की जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करें। यह फैसला याचिकाकर्ता के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून से खिलवाड़ करना अब महंगा साबित हो सकता है।

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