22 जनवरी महाकाल आरती: भांग-चंदन और रजत मुकुट से सजा बाबा महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार, श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में लिया पुण्य लाभ

विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट:
उज्जैन (शिखर दर्शन) // माघ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर, बुधवार को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अलसुबह आध्यात्मिक उत्सव का आयोजन हुआ। सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही भगवान महाकाल की भक्ति और आराधना का विशेष दौर शुरू हुआ।
सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, जिसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से उनका अभिषेक हुआ। इस विधिवत पूजन के बाद बाबा महाकाल को रजत मुकुट, भांग, चंदन और रुद्राक्ष की मालाओं से दिव्य श्रृंगार अर्पित किया गया। भक्तों ने बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला में सजकर आशीर्वाद देते हुए देखा। इसके साथ ही बाबा को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

श्रद्धालुओं ने अलसुबह आयोजित भस्म आरती में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। आरती के दौरान मंदिर परिसर “जय जय श्री महाकाल,” “हर हर महादेव,” और “ॐ नमः शिवाय” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कानों में अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा।
श्रद्धा और भक्ति के इस दिव्य आयोजन में शामिल होकर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल की अनंत कृपा का अनुभव किया। मंदिर का वातावरण भक्तिमय और आलौकिक छटा से भरपूर रहा।



