13 जनवरी महाकाल आरती: भांग, चंदन और आभूषणों से सजा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप, यहां करें दर्शन

विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट:
उज्जैन (शिखर दर्शन) // श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को पौष माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर अलसुबह भस्म आरती के साथ भगवान महाकाल की भव्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई। सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद भक्तों ने भगवान के दिव्य दर्शन किए और माहौल भक्तिमय हो गया।
भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष अभिषेक किया गया। इसके बाद भांग और चंदन से उनका दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। सुगंधित पुष्पों से बनी माला ने उनके रूप को और भी मनमोहक बना दिया। पूजा-अर्चना के बाद बाबा को भस्म अर्पित की गई और फल-मिष्ठान का भोग लगाया गया।

अलसुबह आयोजित भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हुए आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। मंदिर परिसर “जय बाबा महाकाल,” “हर हर महादेव,” और “ॐ नमः शिवाय” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने मंदिर के वातावरण को दिव्यता और भक्ति से भर दिया।
यह पवित्र अवसर भगवान महाकाल के प्रति श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत अनुभव प्रदान करता है, जिसे हर भक्त अपने जीवन में कम से कम एक बार अनुभव करना चाहता है।



