रायपुर दक्षिण में सवा लाख मतदाताओं का मतदान से वंचित रहना, भाजपा या कांग्रेस को होगा नुकसान ?”

रायपुर दक्षिण में कम मतदान: भाजपा और कांग्रेस के लिए होगा नया राजनीतिक संकट ?
रायपुर ( शिखर दर्शन ) // रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट पर हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। इस चुनाव में 2 लाख 73 हजार मतदाताओं में से करीब 51 फीसदी अर्थात 1 लाख 25 हजार से ज्यादा लोग मतदान करने नहीं पहुंचे। यह आंकड़ा विश्लेषकों और राजनीतिक पंडितों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इस बेरुखी के परिणामों का असर भविष्य में दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस पर पड़ सकता है।
विधानसभा क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से करीब 25 हजार अधिक है। पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं की मतदान में रुचि पुरुषों के मुकाबले अधिक रही है, लेकिन इस चुनाव में अनुमान जताया जा रहा है कि महिलाओं ने मतदान में रुचि नहीं दिखाई। वहीं, पुरुषों और युवाओं का वोट न देने के पीछे मुख्य कारण यह था कि इस चुनाव में कोई ठोस मुद्दा नहीं था, जिसके आधार पर वे मतदान के लिए प्रेरित हो सकें।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रायपुर दक्षिण में कम मतदान के पीछे एक बड़ी वजह इस चुनाव का विधानसभा की तस्वीर पर कोई विशेष असर न डालना है। न तो भाजपा सत्ता खो रही है और न ही कांग्रेस सत्ता में वापसी कर रही है। साथ ही, प्रत्याशी भी मतदाताओं में उत्साह पैदा करने में नाकाम रहे। राजनीतिक दलों ने भी ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया, जो मतदाताओं को मतदान केंद्रों की ओर खींच सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही इस चुनाव के परिणामों से विधानसभा की राजनीतिक तस्वीर में कोई बड़ा बदलाव न हो, लेकिन कम मतदान के चलते मतों के बीच अंतर बहुत कम रह सकता है। यदि यह अंतर हजारों से घटकर सैकड़ों तक पहुंचता है, तो परिणामों पर उथल-पुथल हो सकती है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के लिए यह एक नया राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, जिस पर दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करेंगे।
कुल मिलाकर, भले ही यह चुनाव विधानसभा में कोई खास असर न डाले, लेकिन दोनों प्रमुख दलों के लिए यह कम मतदान एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है, जो आगामी राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।



