बिलासपुर संभाग

हर्षोल्लास के साथ कंचन विहार कालोनी में मनाया गया हलषष्ठी (खमरछट) पर्व

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) //सिरगिट्टी नगरपंचायत ऑफिस के पीछे स्थित कंचन विहार में नव निर्मित शिव मंदिर में महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख पारंपरिक त्योहार हलषष्ठी (खमरछट) को बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया।

इस पर्व के दौरान कालोनी की बड़ी संख्या में व्रति महिलाएं निर्जला व्रत रखकर मंदिर परिसर में उपस्थित हुईं। परंपरा के अनुसार, महिलाओं ने इस पवित्र दिन को सामूहिक रूप से मनाने के लिए पूरे आयोजन स्थल को सुगंधित फूलों से सुसज्जित किया।

हलषष्ठी, जिसे खमरछट के नाम से भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ में कृषि और मातृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस दिन महिलाएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव तथा देवी हलषष्ठी की पूजा करती हैं। इस त्योहार का खास महत्व ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में है, जहां महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाते हुए पूजा-अर्चना करती हैं।

सामूहिक आयोजन की एकजुटता और उत्साह
कांचन विहार कालोनी की महिलाओं ने इस आयोजन को मिलजुल कर मनाने की व्यवस्था की, जिससे सामूहिक एकजुटता का परिचय मिला। पूरे आयोजन स्थल को विभिन्न प्रकार के सुगंधित फूलों से सजाकर एक पवित्र और आनंदमय माहौल का निर्माण किया गया, जिससे उपस्थित महिलाओं ने इस पर्व का आनंद उठाया।

छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों में हलषष्ठी की परंपराएं
छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों में हलषष्ठी पर्व को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। कुछ क्षेत्रों में महिलाएं खेतों में हल की पूजा करती हैं, जबकि कुछ स्थानों पर गोबर से बनी मूर्तियों की पूजा का प्रचलन है। इस त्योहार के अवसर पर महिलाओं के लिए विशेष पकवान जैसे भजिया, पकौड़ी, और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जो सामूहिक भोज में परोसे जाते हैं।

कुल मिलाकर, कांचन विहार में मनाए गए इस पवित्र पर्व ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित किया और महिलाओं की एकजुटता तथा सामूहिकता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!