छत्तीसगढ़ का भोजली त्यौहार: मित्रता की परंपरा और उसकी प्रतिज्ञा !

**भोजली त्यौहार का परिचय:**
छत्तीसगढ़ में मनाया जाने वाला भोजली त्यौहार एक महत्वपूर्ण कृषि आधारित लोकपर्व है, जो श्रावण मास के दौरान मनाया जाता है। इस पर्व में विशेष रूप से महिलाओं और युवतियों द्वारा भोजली (एक प्रकार का धान) बोने, उसकी पूजा करने, और भोजली मितान (मित्र) बनाने की परंपरा निभाई जाती है।
**भोजली मितान की परंपरा:**
भोजली मितान बनने की परंपरा विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित है। इस परंपरा के अनुसार, दो युवतियाँ या महिलाएँ एक-दूसरे से मित्रता की प्रतिज्ञा करती हैं। यह प्रतिज्ञा सदैव के लिए मानी जाती है,

जिसमें एक-दूसरे की हर सुख-दुःख में साथ रहने का वादा किया जाता है। भोजली त्यौहार के दौरान, ये मित्र एक-दूसरे के साथ भोजली बांटती हैं, जिससे उनकी मित्रता और अधिक सुदृढ़ होती है।
**प्रतिज्ञा और उसका महत्व:**
भोजली मितान बनने की प्रतिज्ञा को अत्यंत पवित्र और अटूट माना जाता है। यह प्रतिज्ञा एक तरह से भाई-बहन के संबंध के समान मानी जाती है, जिसमें दोनों मित्र एक-दूसरे की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इस प्रतिज्ञा के दौरान, दोनों मित्र भोजली के पौधे के समक्ष वचन लेते हैं कि वे एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। यह परंपरा महिलाओं के बीच सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का एक माध्यम भी है।
**भोजली मितान बनने की प्रक्रिया:**
भोजली त्यौहार की शुरुआत से ही, जो महिलाएँ और युवतियाँ मितान बनने की इच्छा रखती हैं, वे पहले से ही यह निर्णय ले लेती हैं। श्रावण मास के पहले दिन, वे भोजली के बीज बोती हैं और उसकी देखभाल करती हैं। श्रावण पूर्णिमा के दिन, भोजली का विसर्जन करते समय, वे एक-दूसरे से भोजली मितान बनने की प्रतिज्ञा लेती हैं। इस दौरान, भोजली के पौधे को उनके बीच बांटा जाता है और पूजा की जाती है।
**सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व:**
भोजली मितान बनने की परंपरा न केवल व्यक्तिगत संबंधों को सुदृढ़ करती है, बल्कि यह सामुदायिक एकता और महिलाओं के बीच भाईचारे को भी बढ़ावा देती है। इस परंपरा का उद्देश्य महिलाओं के बीच मजबूत सामाजिक संबंध स्थापित करना है, जो सामूहिक सहयोग और समर्थन की भावना को बढ़ावा देता है। यह त्यौहार महिलाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जो उन्हें एक दूसरे के साथ जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का अवसर प्रदान करता है।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ का भोजली त्यौहार न केवल कृषि और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है, बल्कि यह मित्रता और सामाजिक बंधनों को भी महत्व देता है। भोजली मितान बनने की परंपरा इस पर्व का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो सामाजिक सहयोग और समर्थन की भावना को बढ़ावा देती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी अपने मूल स्वरूप में जीवित है।



