सिरगिट्टी का स्वयंभू शिवलिंग: प्राचीन मंदिर की धार्मिक महिमा और श्रद्धालुओं की आस्था !

(शिखर दर्शन)// छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी क्षेत्र में स्थित प्राचीन स्वयंभू शिव मंदिर धार्मिक मान्यता और आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। पुराणों के अनुसार

शिव मंदिरों में दर्शन करने से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं, और इस प्राचीन मंदिर में लोगों की आस्था इसे सही साबित करती है।
इस मंदिर की विशेषता इसका स्वयंभू शिवलिंग है, जो मान्यता अनुसार, भूमि से अपने आप उभरा है। इसका अंतिम छोर आज तक पता नहीं चल पाया है, और यह मान्यता है कि सच्चे मन से की गई मनोकामना यहां पूरी होती है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां पूरे विधि-विधान से शिव पूजन और श्री रूद्राभिषेक किया जाता है ।

जिसके चलते भक्तों की भीड़ लगती है।
स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों ने बताया कि मंदिर का इतिहास 1963 के आसपास का है। उस समय बैजनथिया तालाब के मेड़ पर एक काले पत्थर को शिवलिंग के रूप में देखा गया , जो झुका हुआ था। कई प्रयासों के बावजूद पत्थर को सीधा नहीं किया जा सका। इसके बाद लोगों ने उसे पूजा स्थल मानते हुए पूजा अर्चना शुरू की और आस्था बढ़ने पर एक छोटा मंदिर निर्माण कराया। अब तक इस मंदिर का दो बार जीर्णोद्धार किया जा चुका है।
सिगिट्टी निवासी भृगु अवस्थी अभी वर्तमान में पूरे विधि विधान से शिवलिंग की पूजा अर्चना कर रहे है मंदिर आए श्रद्धालुओं ने बताया कि श्री अवस्थी प्रत्येक दिन ब्रह्म मुहूर्त से ही शिवलिंग का अभिषेक पूजन तथा श्रृंगार इत्यादि करते है जो की दोनो प्रहार जारी है ।

साथ ही लोगो की मनोकामनाएं पूर्ण होने की वजह से मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है ।
यह मंदिर स्थानीय संस्कृति और श्रद्धा का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं को जीवित रखे हुए है।



